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बच्चों की कुंडली0 से 13 वर्ष — ग्रहों के अनुसार परवरिश

दूसरा संस्कार

नाम किस अक्षर से रखें

शास्त्र में नाम जन्म-नक्षत्र से निकलता है। हर नक्षत्र के चार चरण हैं और हर चरण का अपना अक्षर — कुल 108। बच्चे का जन्म जिस चरण में हुआ, नाम उसी अक्षर से शुरू करने की परंपरा है।

अपने बच्चे का अक्षर निकालिए जल्द ही

जन्म के विवरण से अक्षर अपने-आप निकालने की सुविधा जल्द शुरू होगी। तब तक पंडित जी से बच्चे का जन्म-नक्षत्र और चरण पूछ लीजिए, और नीचे की सूची में उस चरण का अक्षर देख लीजिए।

पूरी सूची

27 नक्षत्र · 108 चरण · 108 अक्षर

यह सूची शतपद (अवकहडा) चक्र की है, जैसी मुहूर्त चिंतामणि (5.11 की टीका) में उद्धृत है। गंडमूल वाले छह नक्षत्रों की अपनी रीत है — नीचे लिखी है।

नक्षत्रस्वामी चरण 1चरण 2चरण 3चरण 4
1. अश्विनीगंडमूल Ashwini केतु चूChu चेChe चोCho लाLa
2. भरणी Bharani शुक्र लीLi लूLu लेLe लोLo
3. कृत्तिका Krittika सूर्य आAa ईEe उU एE
4. रोहिणी Rohini चंद्र ओO वा/बाWa/Ba वी/बीWi/Bi वू/बूWu/Bu
5. मृगशिरा Mrigashira मंगल वे/बेWe/Be वो/बोWo/Bo काKa कीKee
6. आर्द्रा Ardra राहु कूKu घGha ङNga छChha
7. पुनर्वसु Punarvasu गुरु केKe कोKo हाHa हीHi
8. पुष्य Pushya शनि हूHu हेHe होHo डाDa
9. अश्लेषागंडमूल Ashlesha बुध डीDi डूDu डेDe डोDo
10. मघागंडमूल Magha केतु माMa मीMi मूMu मेMe
11. पूर्वा फाल्गुनी Purva Phalguni शुक्र मोMo टाTa टीTi टूTu
12. उत्तरा फाल्गुनी Uttara Phalguni सूर्य टेTe टोTo पाPa पीPi
13. हस्त Hasta चंद्र पूPu षSha णNa ठTha
14. चित्रा Chitra मंगल पेPe पोPo राRa रीRi
15. स्वाति Swati राहु रूRu रेRe रोRo ताTa
16. विशाखा Vishakha गुरु तीTi तूTu तेTe तोTo
17. अनुराधा Anuradha शनि नाNa नीNi नूNu नेNe
18. ज्येष्ठागंडमूल Jyeshtha बुध नोNo याYa यीYi यूYu
19. मूलगंडमूल Mula केतु येYe योYo भाBha भीBhi
20. पूर्वाषाढ़ा Purva Ashadha शुक्र भूBhu धाDha फाPha ढाDdha
21. उत्तराषाढ़ा Uttara Ashadha सूर्य भेBhe भोBho जाJa जीJi
22. श्रवण Shravana चंद्र खीKhi खूKhu खेKhe खोKho
23. धनिष्ठा Dhanishtha मंगल गाGa गीGi गूGu गेGe
24. शतभिषा Shatabhisha राहु गोGo साSa सीSi सूSu
25. पूर्वा भाद्रपद Purva Bhadrapada गुरु सेSe सोSo दाDa दीDi
26. उत्तरा भाद्रपद Uttara Bhadrapada शनि दूDu थTha झJha ञYna
27. रेवतीगंडमूल Revati बुध देDe दोDo चाCha चीChi

नामकरण संस्कार कब

परंपरा में जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन। कुछ परिवार सोलहवें दिन या पहले महीने के भीतर भी करते हैं — कुल की रीत जो हो, वही चलती है।

उस दिन शुभ मुहूर्त देखा जाता है, बच्चे के कान में नाम कहा जाता है, और परिवार के सामने पहली बार पुकारा जाता है।

गंडमूल नक्षत्र की रीत

अश्विनी, मघा, मूल, अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती — इन छह को गंडमूल कहा गया है। परंपरा में जन्म से 27वें दिन, जब चंद्रमा उसी नक्षत्र में लौटता है, शांति-पूजन किया जाता है।

यह डरने की बात नहीं है। यह एक रीत है — और इससे बच्चे की कुंडली में कोई बुराई नहीं जुड़ती।

घर का नाम और शास्त्रीय नाम

दोनों अलग हो सकते हैं और परंपरा में होते ही हैं। शास्त्रीय नाम इस अक्षर से रखिए; घर में जिस नाम से पुकारना हो, वह आपकी मर्ज़ी — उस पर कोई नियम नहीं।

अक्षर के साथ पूरी कुंडली

नामाक्षर तो एक हिस्सा है। बच्चे का तत्त्व, स्वभाव, पढ़ाई और तबीयत — सब एक साथ देखना हो तो पूरी कुंडली देखिए।

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