दुसरा संस्कार
शास्त्रात नाव जन्मनक्षत्रावरून निघते. प्रत्येक नक्षत्राची चार चरणे आणि प्रत्येक चरणाचे स्वतःचे अक्षर — एकूण 108. मुलाचा जन्म ज्या चरणात झाला, त्याच अक्षराने नाव सुरू करण्याची परंपरा आहे.
जन्माच्या तपशिलावरून अक्षर आपोआप काढण्याची सुविधा लवकरच सुरू होईल. तोपर्यंत पंडितजींकडून मुलाचे जन्मनक्षत्र आणि चरण विचारून घ्या, आणि खालच्या यादीत त्या चरणाचे अक्षर पाहा.
पूर्ण यादी
ही यादी शतपद (अवकहडा) चक्राची आहे — मुहूर्त चिंतामणीत (5.11 च्या टीकेत) उद्धृत केल्याप्रमाणे. गंडमूळ असलेल्या सहा नक्षत्रांची स्वतःची रीत आहे — खाली लिहिली आहे.
| नक्षत्र | स्वामी | चरण 1 | चरण 2 | चरण 3 | चरण 4 |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. अश्विनीगंडमूळ Ashwini | केतू | चूChu | चेChe | चोCho | लाLa |
| 2. भरणी Bharani | शुक्र | लीLi | लूLu | लेLe | लोLo |
| 3. कृत्तिका Krittika | सूर्य | आAa | ईEe | उU | एE |
| 4. रोहिणी Rohini | चंद्र | ओO | वा/बाWa/Ba | वी/बीWi/Bi | वू/बूWu/Bu |
| 5. मृगशिरा Mrigashira | मंगळ | वे/बेWe/Be | वो/बोWo/Bo | काKa | कीKee |
| 6. आर्द्रा Ardra | राहू | कूKu | घGha | ङNga | छChha |
| 7. पुनर्वसु Punarvasu | गुरू | केKe | कोKo | हाHa | हीHi |
| 8. पुष्य Pushya | शनी | हूHu | हेHe | होHo | डाDa |
| 9. आश्लेषागंडमूळ Ashlesha | बुध | डीDi | डूDu | डेDe | डोDo |
| 10. मघागंडमूळ Magha | केतू | माMa | मीMi | मूMu | मेMe |
| 11. पूर्वा फाल्गुनी Purva Phalguni | शुक्र | मोMo | टाTa | टीTi | टूTu |
| 12. उत्तरा फाल्गुनी Uttara Phalguni | सूर्य | टेTe | टोTo | पाPa | पीPi |
| 13. हस्त Hasta | चंद्र | पूPu | षSha | णNa | ठTha |
| 14. चित्रा Chitra | मंगळ | पेPe | पोPo | राRa | रीRi |
| 15. स्वाती Swati | राहू | रूRu | रेRe | रोRo | ताTa |
| 16. विशाखा Vishakha | गुरू | तीTi | तूTu | तेTe | तोTo |
| 17. अनुराधा Anuradha | शनी | नाNa | नीNi | नूNu | नेNe |
| 18. ज्येष्ठागंडमूळ Jyeshtha | बुध | नोNo | याYa | यीYi | यूYu |
| 19. मूळगंडमूळ Mula | केतू | येYe | योYo | भाBha | भीBhi |
| 20. पूर्वाषाढा Purva Ashadha | शुक्र | भूBhu | धाDha | फाPha | ढाDdha |
| 21. उत्तराषाढा Uttara Ashadha | सूर्य | भेBhe | भोBho | जाJa | जीJi |
| 22. श्रवण Shravana | चंद्र | खीKhi | खूKhu | खेKhe | खोKho |
| 23. धनिष्ठा Dhanishtha | मंगळ | गाGa | गीGi | गूGu | गेGe |
| 24. शतभिषा Shatabhisha | राहू | गोGo | साSa | सीSi | सूSu |
| 25. पूर्वा भाद्रपदा Purva Bhadrapada | गुरू | सेSe | सोSo | दाDa | दीDi |
| 26. उत्तरा भाद्रपदा Uttara Bhadrapada | शनी | दूDu | थTha | झJha | ञYna |
| 27. रेवतीगंडमूळ Revati | बुध | देDe | दोDo | चाCha | चीChi |
परंपरेत जन्मापासून अकराव्या किंवा बाराव्या दिवशी. काही कुटुंबे सोळाव्या दिवशी किंवा पहिल्या महिन्यातही करतात — कुळाची जी रीत असेल तीच चालते.
त्या दिवशी शुभ मुहूर्त पाहिला जातो, बाळाच्या कानात नाव सांगितले जाते, आणि कुटुंबासमोर पहिल्यांदा हाक मारली जाते.
अश्विनी, मघा, मूळ, आश्लेषा, ज्येष्ठा आणि रेवती — या सहांना गंडमूळ म्हटले आहे. परंपरेत जन्मापासून 27व्या दिवशी, चंद्र पुन्हा त्याच नक्षत्रात आल्यावर शांती केली जाते.
ही घाबरण्याची गोष्ट नाही. ही एक रीत आहे — आणि यामुळे मुलाच्या कुंडलीत काही वाईट जोडले जात नाही.
दोन्ही वेगळी असू शकतात आणि परंपरेत असतातच. शास्त्रीय नाव या अक्षराने ठेवा; घरी ज्या नावाने हाक मारायची ती तुमची मर्जी — त्यावर कोणताही नियम नाही.
नामाक्षर हा एक भाग आहे. मुलाचे तत्त्व, स्वभाव, अभ्यास आणि तब्येत — सगळे एकत्र पाहायचे असेल तर पूर्ण कुंडली पाहा.
लवकरच